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गावँ में धनतेरस पर हुई जमकर खरीदारी।

सराय सागर मालटारी।

                   " धनतेरस "

आज गावँ की बाजार में धनतेरस पर अगल बगल के गांवों से लोगों ने खरीदारी की , पूरे बाजार में चहल पहल और रौनक का माहौल रहा, खास तौर से महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

आइये आज आपको धनतेरस से जड़ी जानकारी उबलब्ध कराने की कोशिश करते हैं।

पूजन विधि और शुभ समय।

इस दिन लोग अपने स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए कामना करते हैं। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी को प्रसन्न करने के लिए मंत्रोच्चारण करते हैं।
  
धनतेरस पर पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन लक्ष्मी – गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है। पर इस दिन सबसे महत्वपूर्ण पूजा होती है स्वास्थ्य और औषधियों के देवता धनवंतरी की पूजा की जाती है। इन सभी पूजाओं को घर में करने से स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन लोग अपने स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए कामना करते हैं। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी को प्रसन्न करने के लिए अपने घर के पूजा गृह में जाकर ऊं धं धन्वन्तरये नमः मंत्र का 108 बार उच्चारण करें। ऐसा करने बाद स्वास्थ्य के भगवान धनवंतरी से अच्छी सेहत की कामना करें। ऐसी मान्यता है कि इस दिन धनवंतरी की पूजा करने से स्वास्थ्य सही रहता हैा धनवंतरी की पूजा के बाद यह जरूरी है कि लक्ष्मी और गणेश का पूजन किया जाए।

इसके लिए सबसे पहले गणेश जी को दिया अर्पित करें और धूपबत्ती चढ़ायें। इसके बाद गणेश जी के चरणों में फूल अर्पण करें और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद इसी तरह लक्ष्मी पूजन करें। इसके अलावा इस दिन धनतेरस पूजन भी किया जाता है और कुबेर देवता की पूजा की जाती है। धनवंतरी जहां स्वास्थय के देवता हैं वहीं कुबेर धन के देवता माने जाते हैं।

धनतेरस पूजा विधि।

सबसे पहले एक लकड़ी का पट्टा लें और उस पर स्वास्तिक का निशान बना लें। इसके बाद इस पर एक तेल का दिया जला कर रख दें। दिए को किसी चीज से ढक देना चाहिए। दिए के आस पास तीन बार गंगा जल छिड़कें। इसके बाद दीपक पर रोली का तिलक लगाएं और साथ चावल का भी तिलक लगाएं। इसके बाद दीपक में थोड़ी सी मिठाई डालकर मीठे का भोग लगाएं। फिर दीपक में 1 रुपया रखें। रुपए चढ़ाकर देवी लक्ष्मी और गणेश जी को अर्पण करें। इसके बाद दीपक को प्रणाम करें और आशीर्वाद लें और परिवार के लोगों से भी आशीर्वाद लेने को कहें। इसके बाद यह दिया अपने घर के मुख्य द्वार पर रख दें, ध्यान रखे कि दिया दक्षिण दिशा की ओर रखा होना चाहिए।

धनतेरस पूजा शुभ मुहूर्त।

धनतेरस पूजा का समय- शाम 7 बजकर 32 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक।
प्रदोष काल- शाम 5 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक।
वृषभ काल- शाम 7 बजकर 32 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 33 मिनट तक।
माता लक्ष्मी की पूजा सूरज डूबने के बाद जब प्रदोष काल शुरु हो जाता है तब कभी भी की जा सकती है।

रिपोर्ट- सराय सागर मालटारी ब्यूरो।

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