सराय सागर मालटारी
"होलिका दहन"
आज गांव में होली की पूर्व संध्या पर गांव स्थित हनुमान मंदिर के पास होलिका दहन किया गया। जिसमें गांव के बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और बड़े ही उत्साह के साथ इस होलिका दहन का आनंद उठाया, गावँ में प्रतिवर्ष होली की पूर्व संध्या पर गांव में होलीका दहन किया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होली से हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है। असुराधिपति राजा हिरण्य कश्यप भगवान विष्णु से घोर शत्रुता रखता था। इसने अपनी शक्ति के घमंड में आकर स्वयं को भगवान कहना शुरू कर दिया और ऐलान कर दिया कि राज्य में केवल उसी की पूजा की जाएगी। उसने अपने राज्य में यज्ञ और आहूति बंद करवा दी और भगवान के भक्तों को सताना शुरू कर दिया।
हिरण्य कश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता के लाख कहने बावजूद प्रहलाद विष्णु की भक्ति करता रहा। राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने की भी अनेक बार कोशिश की किंतु भगवान विष्णु स्वयं उसी रक्षा करते रहे और उसका बाल भी बांका नहीं हुआ। असुराधिपति हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को भगवान शंकर से ऐसी चादर मिली थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। हाेलिका उस चादर को ओढ़कर प्रहलाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई।
दैवयोग से वह चादर उड़कर प्रहलाद के ऊपर आ गई, जिससे प्रहलाद की जान बच गई और होलिका जल गई। होलिकादहन के दिन होली जलाकर होलिका नामक दुर्भावना का अंत और भगवान द्वारा भक्त की रक्षा का जश्न मनाया जाता है।
होली का पर्व प्रेम और सद्भावना से जुड़ा त्यौहार है, जिसमें अध्यात्म का अनोखा रूप झलकता है। इस त्यौहार को रंग और गुलाल के साथ मनाने की परम्परा है। इस त्यौहार के साथ कई पौराणिक कथाएं एवं मान्यताएं जुड़ी हुई है।
पौराणिक महत्व-
होली का पर्व भारतवर्ष में अति प्राचीन काल से मनाया जाता आ रहा है। इतिहास की दृष्टि से देखें तो यह वैदिक काल से माना जाता रहा है। हिन्दू मास के अनुसार होली के दिन से नए संवत की शुरूआत होती है। चैत्र कृष्ण प्रतिप्रदा के दिन धरती पर प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था। इसी दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था।
इन सभी खुशियों को व्यक्त करने के लिए रंगोत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा हुडदंग और रंगोत्सव का यह भी कारण बताया जाता है कि नृसिंह रूप में भगवान विष्णु इसी दिन प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्यप नामक महाअसुर का वध कर भक्त प्रहलाद को दर्शन दिए थे।
आज के दिन हमारे गावँ में गावँ के सभी लोग हनुमान मंदिर के पास इकट्ठा होकर इसका आनंद उठाते है।
रिपोर्ट- सराय सागर मालटारी ब्यूरो।
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