सराय सागर मालटारी
"अंतराष्ट्रीय महिला दिवस "
किसी भी देश की प्रगति के लिए जरूरी है उस देश की आर्थिक, राजनितिक और सामाजिक क्षेत्रो में महिलाओ की भूमिका, बिना महिलाओ के योगदान के कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता. अत: इसके लिए जरुरत है लिंग असमानता (Gender inequality) खत्म करने की। ऐसे कई देश है जहाँ आर्थिक और राजनतिक क्षेत्रो में महिलाओ की संख्या पुरुषो के मुकाबले बहुत कम है, कई जगहों पर महिलाये पुरुषो की तुलना में शिक्षा में बहुत पिछड़ी हुई है। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन इन असमानताओ को दूर करने के लिए, समाज को ध्यान दिलाने के लिए पुरे विश्व से महिलाये एक साथ एकत्रित होती है. कई देशो में महिलाये एकत्रित होकर मार्च, रैलीया निकालती है। कला कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है, भाषण और सेमिनार आयोजित किये जाते है. उन महिलाओ को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने सभी असमानताओ से लड़ा और उपलब्धियाँ हासिल की। इन्ही सार्थक पहलुओं को ध्यान देते हुए आज हमारे गावँ स्थित श्री गांधी पी जी कॉलेज मालटारी में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अंतराष्ट्रीय महिला दिवस विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि दिनेश कुमार राय एवं श्रीमती नीलम राय (प्रबन्धक) की अध्यक्षता में कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सबसे पहले कार्यक्रम की शुरुआत शिमला मिश्रा एवं नीतू मिश्रा द्वारा सरस्वती वंदना से की गई, स्वागत गीत सुमित्रा चौहान के द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसी कड़ी में डॉ० गिरजेश सिंह( बी एड विभाग) ने कहा कि-- स्त्रियां प्राचीन काल में भी पूज्यनीय थी, आज भी है और भविष्य में भी रहेंगी,
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
डॉ कौशलेन्द्र विक्रम मिश्र(एसोसिएट प्रोफेसर अर्थशास्त्र) ने कहा कि---- स्त्री और पुरूष दोनों एक दूसरे के पूरक है, दोनों को एक दूसरे को सम्मान देना चाहिए।
डॉ० शशि कुमार मिश्र ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ---जब बहन रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, उसी समय वह अपने भाई से वादा करा ले, कि आप जिस तरह का व्यवहार हमारे साथ करते हैं, वही व्यवहार अन्य लड़कियों के साथ भी करें।
डॉ० शैलेश पाठक ने कहा कि---- प्राचीन काल में मानव का दुश्मन पशु था, किंतु आज के आधुनिक परिवेश में मानव का दुश्मन मानव हो गया है। आगे उन्होंने कहा कि स्त्री का दुश्मन स्त्री हो गई है, इसीलिए लड़कियां (नई बहूएं)दहेज के लिए जलाई जाती है, यदि सास अपनी बहू का सम्मान करें, और दहेज की चर्चा न करें, तो इस तरह की समस्या नहीं आएगी और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
इसी क्रम में डॉ० प्रदीप राय ने कहा कि--- आज महिलाएं उपेक्षित है एक महिला जो 9 महीने तक अपने बच्चे को गर्भ में रखती है उसको यह भी अधिकार नहीं कि वह कितने बच्चे को पैदा करेगी, आज महिलाओं को सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन बना दिया गया है, आज के समाज में महिला को अधिकार विहीन बना दिया जाता है।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ० अखिलेश तिवारी ने कहा कि----पौराणिक संदर्भों के अनुसार नारी शक्ति को सदैव महत्व दिए जाने का उल्लेख मिलता है, जैसे राधा कृष्ण, सीताराम, वर्तमान परिवेश में भी इस निरंतरता को बनाए रखने की अति आवश्यकता है, तभी अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी।
इस अवसर पर दिनेश कुमार राय, श्रीमती नीलम राय (प्रबंधक), डॉ० दिनेश दुबे, प्रमोद कुमार, डॉ० प्रदीप राय, एवं विष्णु सहाय मिश्र उपस्थित रहे।
रिपोर्ट- सराय सागर मालटारी ब्यूरो।
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