सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कल मनाया जाएगा स्व० मथुरा राय जन्मदिवस समारोह एंव श्री गाँधी पीजी कालेज वार्षिकोत्सव।

सराय साग़र मालटारी।

        "स्व० मथुरा राय जन्मदिवस समारोह एंव श्री गाँधी पीजी कालेज वार्षिकोत्सव"
 
गावँ के श्री गाँधी पीजी कालेज मालटारी में आज स्व० मथुरा राय का जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जायेगा।
इस विकास पुरुष का नाम सराय सागर मालटारी के इतिहास के पन्नो में सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है, यह कहना गलत नहीं होगा कि इन्होंने अपने मेहनत एवं अथक प्रयास से गावँ को एक नयी दिशा दी। आज हमारा गावँ शिक्षा जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान रखता है, जिसमें स्व० मथुरा राय एवं उनके विशेष सहयोगी रहे डॉ कुबेर मिश्र जो की गाँधी इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य एंव श्री गाँधी पीजी कालेज में प्राचार्य रूप में रहे इन दोनों महापुरुषों का योगदान भुलाया नहीं जा सकता, डॉ कुबेर मिश्र आज भी इस दिशा में जुड़े हुए हैं, और वृद्धावस्था में होने के बाद भी निरन्तर प्रयत्नशील रहते हैं।
उनके द्वारा रोपा गया शिक्षा का एक छोटा सा बीज आज एक बहुत बड़ा वृक्ष का रूप ले चूका है। देश विदेश में यहाँ के छात्र अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, और इस गाँव की माटी का गौरव बढ़ा रहे हैं।
स्व० मथुरा राय के जीवन पर प्रकाश डाला जाय तो इनके अंदर बचपन से ही शिक्षा के प्रति झुकाव था, अनपढ़ होने का मर्म और शिक्षा की महत्ता को ये अच्छी तरह से जानते थे।
बाल्यकाल में गावँ से कई कोशों दूर जाकर पढ़ाई करने जाते समय हो रही कठिनाईयों का अनुभव इन्होंने किया, बी०एच०यू० में इलेक्ट्रॉनिक एंड मैकेनिकल से इंजीनियरिंग करने के बाद  इनके मन में अपने क्षेत्र को शिक्षित करने का जूनून सवार हुआ तो गावँ की बाजार में इन्होंने 1949 में गाँधी इंटर कॉलेज की छप्पर डालकर आधारशिला रखी , जिसमे गावँ के सम्भ्रांत नागरिकों में स्व० दीपचंद राय, स्व० सीताराम राय, स्व० नरसिंह राय शर्मा, स्व० फूलचंद राय आदि के साथ गावँ के अन्य लोगों ने अपनी जमीनों को दान देकर श्रमदान कर महत्वपूर्ण योगदान दिया, 1968 में श्री गाँधी पीजी कालेज मालटारी की मान्यता लेने के लिए जब ये मि० थॉमस ( वायसराय गोरखपुर) के पास गए तो मि० थॉमस ने इनसे सवाल किया , मान्यता किस दम पर लेना चाहते हैं ?
इन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ जबाब दिया - धैर्य , चरित्र , साहस तीनों है मेरे पास इन्ही के दम पर मान्यता लेना चाहता हूँ।
मि० थॉमस मुस्कुराये और सुबह बुलाकर शर्तो के साथ मान्यता दे दी।
स्व० राय द्वारा अपने कथन को मूर्त रूप देने के बाद मि० थॉमस जब विद्यालय पर आये तो स्व० राय की प्रशंसा करते हुए कहा - मथुरा राय ने जो कहा था,आज करके दिखा दिया।
इन्होंने गावँ को शिक्षा के मामले में और मजबूत करते हुए सत्य सेवा बालिका इंटर कॉलेज, सत्य सेवा आदर्श इंटर कालेज , सत्य सेवा नर्सरी विद्यालय की भी आधारशिला रखी।
शासन में अपनी योग्यता का परचम लहराते हुए ये विद्युत विभाग में चीफ इंजीनियर, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर , उत्पादन निगम प्रबन्ध निदेशक आदि पदों पर आसीन रहे, सेवानिवृत होने के बाद ये केंद्र सरकार में ऊर्जा मंत्री स्व० कल्पनाथ राय के बेहद करीबी सलाहकार के रूप में 1988 से 1990 एवं 1991 से 1995 तक रहे।
इन पदों पर रहते हुए इन्होंने गावँ एवं क्षेत्र को बिजली के उजालों से नहला दिया , गावँ को 24 घण्टे बिजली देने के लिए इन्होंने विद्युत सबस्टेशन मिर्जापुर मालटारी का निर्माण कराया, और दो फीडर से बिजली देने की व्यवस्था करायी जिसमे मऊ जनपद गोठा से एक फीडर को जोड़ा तो एक को आजमगढ़ शहर से जोड़ दिया। गावँ में 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति होती थी, जिसका लाभ आज भी इस क्षेत्र एवं गावँ को मिलता है।
इसके अलावा इन्होंने ओबरा, इलाहाबाद , कानपूर,अलीगढ़ और पूर्वांचल में अनेक विद्युत् स्टेशनों का निर्माण कराया और अंधेरों को दूर करते हुए प्रकाश की व्यवस्था की।
तथा शिक्षा को बढ़ावा देते हुए अपने कार्यकाल के दौरान जहाँ जहाँ रहे शिक्षा की नींव डालते गये जो आज भी अपनी बुलंदियों को छू रहा है।
इन्होंने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर कहा था-
1-

"कृपणता ईमानदारी की निशानी है,
शाहखर्ची बेईमानी की जननी है।"

2-

"अनुशासन एक ऐसी छतरी है,
जिसमें रहकर सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।"

3-

"अफसर की अनुपस्थिति में हमारा कार्य और भी बेहतर होना चाहिए।"

स्व० मथुरा राय अपने कार्य के प्रति बेहद ईमानदार एंव कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति थे, व्यक्तित्व के प्रभावशाली व्यक्ति के साथ गजब का संयम और साहस भी था , गावँ में शिक्षा की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए इन्होंने कहा था-

" पढ़ाई अच्छी होनी चाहिए, पर नकल नहीं।"

आज भी इनके द्वारा दी गयी दिशा पर गावँ के विद्यालय चलते हैं, और नकलविहीन परीक्षा के लिए जाने जाते हैं।
इनके महत्वपूर्ण  योगदान ने गावँ की दिशा और दशा दोनों को बदल कर रख दिया,  इनकी मृत्यु 70 साल की अवस्था में 26 मार्च 1995 को इनके गावँ भदांव के पुस्तैनी आवास पर रात्रि 8:30 पर हो गयी।
क्षेत्र के लोग आज भी इस महापुरुष का नाम बड़े ही तहजीब के साथ लेते हैं, इनका जन्मदिन प्रतिवर्ष बड़ी ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है।

रिपोर्ट- सराय सागर मालटारी ब्यूरो।

हमारे ट्वीटर अकाउंट से जुड़ने के लिए हमें फॉलो करे।
ट्वीटर आईडी -

@maltari123

हमारे फेसबुक पेज़ से जुड़ने के लिए पेज को लाइक व शेयर करें।

फेसबुक पेज -

https://www.facebook.com/sarai.sagar.maltari123

गावँ सम्बन्धी समस्याएँ, सलाह एवं अपने विचार तथा गावँ सम्बन्धी अपने लेख आप भी हमें दे सकते हैं।

संपर्क करे या व्हाट्सप्प करे -

9582008479
9452330115


टिप्पणियाँ