"महाशिवरात्रि"
सराय सागर मालटारी के समस्त नागरिकों की तरफ से देश वासियों को " महाशिवरात्रि पर्व" की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आज गावँ में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धा के साथ मनाया गया गावँ की माताओं एवं बहनों ने शिव मंदिर पर जल और दूध से जलाभिषेक किया गया।
हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह त्योहार प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को अर्थात अमावस्या से एक दिन पहले वाली रात को मनाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर रूद्र के रूप में प्रजापिता ब्रह्मा के शरीर से प्रकट हुए थे और इसी महाशिवरात्रि ( Essay on Mahashivratri in Hindi ) को भगवान शिव तांडव नृत्य करते हुए इस सृष्टि को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से भष्म कर देंगे, कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था, इन सब कारणों से महाशिवरात्रि की रात हिंदू धर्मग्रंथों में अतिमहत्त्वपूर्ण है।
महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवमंदिर में कतारें लग जाती हैं , लोग जल से तथा दूध से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं , जहाँ तक हो सके लोग गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराते हैं , कुछ लोग दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से भी स्नान कराते हैं, फिर उन पर चंदन लगाकर उन्हें फूल, बेल के पत्ते अर्पित किये जाते हैं । धूप और दीप से भगवान शिव का पूजन किया जाता है ,भगवान शिव को बेल के पत्ते अतिप्रिय है इसलिए लोग उन्हें बेलपत्र अर्पण करते हैं । महाशिवरात्रि ( Essay on Mahashivratri in Hindi ) को रात्री जागरण का भी विधान है , लोग शिवमंदिरों में अथवा घरों में पूरी-पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं, कई लोग इस दिन शरीर और मन को पवित्र करने के लिए उपवास भी रखते हैं, कुछ लोग निर्जल रहकर भी उपवास करते हैं , कई जगह भगवान शिव की बारात भी निकाली जाती है।
महाशिवरात्रि से संबंधित कई पौराणिक कथाएँ भी हैं जो बहुत प्रेरणादाई हैं, ऐसी ही एक कथा में चित्रभानु नामक एक शिकारी का उल्लेख मिलता है , चित्रभानु को महाशिवरात्रि के व्रत का कोई ज्ञान नहीं था ,वह जंगल के जानवरों को मारकर अपना जीवन यापन करता था। एक बार महाशिवरात्रि के दिन अनजाने में उसे शिवकथा सुनने मिली ,शिवकथा सुनने के बाद वह शिकार की खोज में जंगल गया । वहाँ शिकार का इंतज़ार करते-करते वह अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर घास के ढेर के नीचे ढँके हुए शिवलिंग पर फेंकता जाता ,उसके इस कर्म से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसका ह्रदय निर्मल बना देते हैं ,उसके मन से हिंसा के विचार नष्ट जाते हैं ,वह जंगल शिकार करने गया था किंतु एक के बाद एक ४ हिरणों को जीवनदान देता है , उस दिन के बाद से चित्रभानु शिकारी का जीवन छोड़ देता है ।
इस कहानी से हमें भगवान शिव की दयालुता का परिचय मिलता है , वे अनजाने में की हुई पूजा का भी फल प्रदान करते हैं , एक हिंसक शिकारी का ह्रदय करुणामय बना देते हैं । इस तरह महाशिवरात्रि ( Essay on Mahashivratri in Hindi ) का त्योहार प्राणिमात्र के प्रति दया और करुणा का संदेश भी देता है । धार्मिक ग्रंथों में ऐसा विधान है कि भगवान शिव की पूजा करने से सारे सांसारिक मनोरथ पूरे हो जाते हैं । नीति-नियम से न हो सके तो साधारण तरीके से पूजा करने पर या सिर्फ उन्हें स्मरण कर लेने पर भी भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं।
प्रति वर्ष हमारे गावँ में यह त्यौहार बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है , इस दिन सुबह से ही मंदिर पर उत्सव मेले जैसा माहौल रहता है।
रिपोर्ट- सराय सागर मालटारी ब्यूरो।
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